भारत के वरिष्ठ शिया धर्मगुरू और लखनऊ के इमामे जुमा के नेतृत्व में कल होने वाले प्रदर्शन (य़ौमे फ़ैसला) से यूपी की समाजवादी सरकार की नींद उड़ी हुई है।
प्राप्त सूचना के अनुसार भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रदेश के बड़े अधिकारियों की मौलाना कल्बे जवाद के नतृत्व में होने वाले प्रदर्शन को लेकर बैठक हुई जिसमें सुरक्षा एवं लखनऊ शहर के यतायात संबंधित निर्देश दिए गए।
दूसरी ओर प्रदेश की समाजवादी सरकार लखनऊ में शिया मुसलमानों द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन पर अपनी पूरी नज़र रखे हुए है।
लखनऊ से प्राप्त ख़बरों के अनुसार पूरे उत्तर प्रदेश के शिया समुदाय में य़ौमे फ़ैसला नामी प्रदर्शन को लेकर काफ़ी उत्सुकता देखी जा रही है। पूरे राज्य के विभन्न शहरों से लोग बसों, ट्रेनों और अपने अपने वाहनों से लखनऊ जा रहे हैं।
लखनऊ स्थित दरगाह हज़रत अब्बास में कल रात हुए एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ शिया धर्मगुरू मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि जब तक प्रदेश की सरकार हमारा अधिकार को हमे नहीं देगी तब तक हम संघर्ष करते रहेंगे।
उन्होंने कल होने वाले शिया मुसलमानों के प्रदर्शन को बहुत ही महत्वपूर्ण बताया और कहा कि लोग हमारे ख़िलाफ साज़िशें कर रहे हैं, वे चाहते हैं कि हम अपने अधिकारों से पीछे हट जाएं और वह लोग जो चाहें करें। मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि शिया मुसलमान एक जीवित राष्ट्र है जो कभी भी अपने अधिकारों को पाए बिना पीछे नहीं हटेगा। लखनऊ के इमामे जुमा ने कहा कि शिया मुसलमानों के बीच फूट डालने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं, धार्मिक हथकंडे भी अपनाए जा रहे हैं, लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से भड़काया जा रहा है, उन्होंने कहा कि कल प्रदर्शन में लोग न आएं उसके लिए अलग अलग रास्ते अपनाए गए हैं। मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि प्रदेश की पुलिस एक बड़े मंत्री के इशारे पर लोगों को कल के प्रदर्शन में जाने से रोकने के लिए नोटिस भेज रही है ताकि लोग भयभीत होकर कल होने वाले ऐतिहासिक प्रदर्शन में भाग न लें। मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि हमारी क़ौम डरने वाली क़ौम नहीं है जिसको ताक़त और पुलिस द्वारा डरा दिया जाए।
ज्ञात रहे कि मौलाना कल्बे जवाद शिया वक़्फ बोर्ड में हो रहे घोटालों और सरकारों द्वारा शिया मुसलमानों की अनदेखी के विरुद्ध सालों से संघर्ष कर रहे हैं। जानकार हल्क़ों का मानना है कि लखनऊ में कल होने वाला य़ौमे फ़ैसला नामक प्रदर्शन ऐतिहासिक होगा, जिसमें लाखों शिया मुसलमानों के एकत्रित होने की संभावना है।